Kya Nabi ﷺ Technology Ke Daur Me Aate To Islam Zyada Phelta?

Sochiye agar aaj ke digital daur me, jab har shakhs ke haath me smartphone hai aur har cheez viral ho sakti hai, kisi nabi ka zahoor hota… kya uska paighaam zyada tezi se failta? Yeh sawal bohat se logon ke zehan me aata hai, khaaskar jab Islam ka daawa hai ke Nabi Muhammad ﷺ duniya ke aakhri paighambar hain. Lekin kya yeh objection theek hai?

Is article me hum yehi masla detail me samjhenge – logical, historical aur Islamic angle se. Hum dekhenge ke kya paighambar ka time matter karta hai, aur kya aaj ki technology Allah ki hikmat se behtar tareeqa tha Islam phailane ka?




Transcript: (00:00) आपने जो बात कही ना कि इस्लामिक थियोलॉजी यह कहती है या आपने इसको गलत समझा यह नहीं कहती है मैं आपको बताता हूं क्या कहती है जिन लोगों तक रसूल अकरम सल्लल्लाहु अल वसल्लम का पैगाम नहीं पहुंचा ठीक है वोह चाहे किसी भी वजह से नहीं पहुंचा हो आज भी एक तादाद ऐसी होगी कि जिन तक इस्लाम का या आप सला वसल्लम का पैगाम नहीं पहुंचा उनको अकल तो अल्लाह ताला ने दी है अकल तो सबके पास है उसके लिए इस्लाम का पैगाम इंटरनेट होने की जरूरत नहीं है अकल तो आपके पास भी दुनिया में हर एक आदमी के पास है इतनी अकल कि वह अपनी अकल को इस्तेमाल करके एक खुदा

(00:33) यानी क्रिएटर चाहे वो उसको अल्लाह कह रहा है कुछ और कह रहा है ईश्वर कह रहा है एक क्रिएटर तक वो पहुंच सकता है कि भाई क्रिएटर एक है लेकिन उसको यह नहीं पता चल रहा है कि उसकी इबादत कैसे करनी है उसको यह नहीं पता चल रहा है कि उसने अपने एंबेसडर यानी रसूलों को भेजा है कि नहीं भेजा है भेजा है तो वो कौन है और इस हालत में उसका इंतकाल हो जाता है तो वो इंशा अल्लाह जन्नत में जाएगा वो जहन्नम में नहीं जाएगा क्यों इसलिए कि उस तक पैगाम नहीं पहुंचा तो इस्लाम ने तो ये वाज कर दिया तो क्या यह आपके लिए जस्टिफिकेशन होगा कि चूंकि मैं करप्ट सोसाइटी में पैदा

(01:04) हुआ हूं लिहाज मुझे तो करप्ट ही होना चाहिए नहीं मुझे तो मतलब समझना पड़ेगा कि क्या चीज सही है और उसके हिसाब से प्रोपेल करना पड़ेगा तो जिस तरीके से आप करप्शन को महज इसलिए कि करप्ट सोसाइटी में पैदा हुए हैं आप दुरुस्त नहीं समझ सकते अपनी अकल के जरिए आप फैसला करेंगे कि यह चीज गलत है और यह चीज सही है मुझे सही चीज का इंतखाब करना चाहिए हम यानी देखें इंडिया में आप इंडिया से ही है तो तो जो सबकॉन्टिनेंट का जो मुसरा था आज से 40 साल पहले आज से 50 साल पहले क्या एजुकेशन का वो लेवल था जो आज है क्या उतनी तादाद में बच्चे स्कूल

(01:40) जाते थे जो आज जाते हैं नहीं मां-बाप आमतौर से क्या खेतों के अंदर काम करते थे जहालत थी हर तरफ लेकिन क्या उन किसानों ने यह कहा कि चूंकि हमने खेतों में काम किया है तो हमारे बच्चे भी हमेशा खेतों में ही काम करते रहेंगे नहीं बल्कि उन्होंने खुद अपने बच्चों को स्कूल भेजा तालीम आम हुई क्यों इसलिए कि उनकी अकल ने फैसला किया कि भाई ये काम कब तक करते कर जो ये कहते होंगे कि भाई राम जी का कोई हिस्टोरिकल प्रूफ नहीं है गांधी भी उसी में आते हैं गांधी जी भी यही कह कर गए थे कि राम जी का कोई हिस्टोरिकल सबूत नहीं है लेकिन हिस्टोरिकल प्रूफ ना होने के बावजूद

(02:13) हिंदुओं की अक्सर ने मेजोरिटी ने यह मान लिया कि यहां पैदा हुए थे इस जगह इस इन इन 10 फुट वाले इस 10 फुट के कमरे में पैदा हुए थे इमेजिन करें कि एक शख्सियत जो आज से करोड़ों साल पहले लाखों करोड़ों साल पहले आई उसके बारे में ये पता हो कि इस कमरे में पैदा हुआ था यह बहुत ही मु लेकिन लोग इसको मान रहे और आप इसको तस्लीम नहीं करते तो इसका मतलब य है कि अय अगर मेजोरिटी किसी चीज को सही माने तो व सही नहीं हो जाती खुद ब खुद चलो भाई फिर अभिषेक का नंबर आ गया हा भाई हेलो मु साहब आवाज आ जी बिल्कुल आ रही है बढ़िया मुफ साब मेरा आपसे क्वेश्चन यह था की जो

(02:53) प्रोफेट मोहम्मद है वो अराउंड 6 में कुछ आए थे ना जी 570 में आए और 630 में दुनिया से चले गए वो राइट तो मेरे को ये बोलना है कि 630 मतलब इस्लाम में ऐसा क्यों कहा गया है कि वो वो मतलब वो आखरी प्रॉफिट होंगे मतलब उनके बाद कोई नहीं आएगा क्योंकि मेरे को मेरा मतलब लॉजिक जो सोचता है उस हिसाब से मुझे लगता है कि मतलब वो टाइम पर वो अगर कुछ प्रिज भी कर रहे हैं तो पूरे वर्ल्ड को कहां पता चलने वाला है मतलब जैसे कि टिल 19 सेंचुरी तक भी देखे या 20 सेंचुरी के अलिर तक भी देखे कोई मतलब किसी एरिया में कोई प्रीज कर रहा है तो बिफोर इंटरनेट आने इंटरनेट

(03:41) आने के पहले तो लोगों को कुछ भी नहीं पता होगा ना मतलब मतलब कोई बात को फैला रहा है इसमें मसला क्या हुआ मुझे मसला बताए तो जो हा वो प्रीच कर रहे है तो बत लिमिटेड लोगों तक रह जा रही है ना मतलब अगर वो गॉड के जो डिवाइन या गॉड के गड से उनको कुछ मैसेज आते हैं तो वो वो अगर व दावा कर रहे हैं वो तो फिर वो बहुत लिमिटेड लोगों तक र जा रहा हैय टेड लोगों पहुचा तो उसम नुकसान क्या हुआ मैं यह पूछना चाह रहा हूं आपसे बाकी के लोग तो महरूम रह गए ना महरूम रह गए उसके बाद क्या होगा महरूम रहने का नुकसान क्या है हा नुकसान यह है कि इस्लामिक लजी

(04:27) क्या बोलती है कि कुछ लोग हेल जाएंगे कुछ हेवन में जाएंगे अब जिनके सामने कुछ लोगों के सामने मोहम्मद साहब आएंगे और उनके जो वो जो उन्होंने जो भी मैं अब आपको यहां रोक रहा हूं मैं सवाल आपका समझ गया हूं पूरा इसीलिए मैं आपको यहां तक लाना चाह रहा था आपने जो बात कही ना कि इस्लामिक थियोलॉजी यह कहती है या आपने इसको गलत समझा यह नहीं कहती है मैं आपको बताता हूं क्या कहती है जिन लोगों तक रसूल अकरम सल्लल्लाहु अल वसल्लम का पैगाम नहीं पहुंचा ठीक है वो चाहे किसी भी वजह से नहीं पहुंचाओ आज भी एक तादाद ऐसी होगी कि जिन तक इस्लाम का या आप सला सलम का

(05:05) पैगाम नहीं पहुंचा उनको अकल तो अल्लाह ताला ने दी है अकल तो सबके पास है उसके लिए इस्लाम का पैगाम या इंटरनेट होने की जरूरत नहीं है अकल तो आपके पास भी दुनिया में हर एक आदमी के पास है इतनी अकल कि वह अपनी अकल को इस्तेमाल करके एक खुदा यानी क्रिएटर चाहे वह उसको अल्लाह कह रहा है कुछ और कह रहा है ईश्वर कह रहा है एक क्रिएटर तक वो पहुंच सकता है कि भाई क्रिएटर एक है लेकिन उसको यह नहीं पता चल रहा है कि उसकी इबादत कैसे करनी है उस को ये नहीं पता चल रहा है कि उसने अपने एंबेसडर यानी रसूलों को भेजा है कि नहीं भेजा है भेजा है तो वो कौन है और इस हालत

(05:36) में उसका इंतकाल हो जाता है तो वह इंशा अल्लाह जन्नत में जाएगा वह जहन्नम में नहीं जाएगा क्यों इसलिए कि उस तक पैगाम नहीं पहुंचा तो इस्लाम ने तो यह वाज कर दिया दूसरा मैं हजरत यह कहना चाहता हूं यह जो भाई ने प्रेमिसेस खड़ा किया ना मफज य मरूजा देखिए नबी के मबस होने से ज्यादा उसके पैगाम का का मकसद होता है ये आपने याद रखना है यानी एक है नबी और एक है नबी का पैगाम अंबिया तो पहले भी आए थे मगर पैगाम साबित नहीं रहा तो नबी पाक सल्लल्लाहु वसल्लम ठीक है आज से 1400 साल पहले आए थे मगर पैगाम का एपिक आप देखें कि आज भी पूरी दुनिया के अंदर सबसे फास्टेस्ट

(06:17) ग्रोइंग अगर कोई कांसेप्ट या कोई टीचिंग या कोई रिलीजन जो भी आप नाम देना चाहे कोई आइडियो जीी व इंडिविजुअल हो या बड़े पैमाने पर मुल्कों के अंदर दुनिया में कहीं भी वो इस्लाम माना जा रहा है अब नबी पाक सला सलम की सदाकत की यह मुह बोलती सबूत इसलिए है कि एक शख्स 1400 साल पहले गुजर गया जिसकी सिर्फ तालीम बाकी है मुल्क तबाह बर्बाद हो रहे हैं मुसलमान अपनी आलमी सत के ऊपर हाल में बड़े कमजोर हैं मगर पैगाम उसका जो है वह सरच बो ये आमिर भाई सही मुस्लिम की एक रिवायत है अभिषेक साहब मैं आपको बता दूं कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अ वसल्लम ने इरशाद फरमाया के कयामत के दिन

(06:57) सबसे बड़ी उम्मत मेरी होगी अना अयात के सबसे ज्यादा इतबा करने वाले या फॉलोअर्स जो हैं व मोहम्मद सलम के होंगे अब यह बात आप कब कह रहे हैं यह बात आज से 1400 साल पहले कही जा रही है तो कितने फॉलोवर्स जब रसूला इस दुनिया से तशरीफ ले जा रहे थे पर्दा फरमा रहे थे तो कितने फॉलोअर्स थे उस वक्त तकरीबन एक लाख के करीब फॉलोअर्स थे ठीक है एक लाख कुछ कम ज्यादा होंगे एक लाख के करीब थे इमेजिन करो कि अगर एक आदमी के एक लाख फॉलोवर हो और यह प्रिडिक्ट कर दे वो कि मेरे फॉलोअर्स दुनिया में किसी भी नबी के फॉलोवर से ज्यादा होंगे तो ये बहुत बड़ा

(07:33) प्रेडिक्शन है इस प्रेडिक्शन को सच्चा होते होते भी इस दुनिया में भी बड़ा टाइम लगना है वो लगा अब इस वक्त 2050 के बारे में जो प्रेडिक्शन की जा रही है वो यह कि बाय 2050 इस्लाम विल बिकम द लार्जेस्ट रिलीजन ईसाइयत को पीछे छोड़ देगा इस वक्त जो तादाद में मुसलमान और ईसाइयों का ही मुकाबला है आपस में बाकी तो कोई किसी खाते में नहीं है तो अगर ईसाइयों को भी पीछे छोड़ दिया जाएगा और मुसलमान सबसे ज्यादा फॉलोअर्स होंगे मुसलमान सबसे ज्यादा होंगे दुनिया में तो ऐसा तो नहीं है कि 2051 में कयामत आ जाएगी फिर कयामत तक के कितने साल है तो आप तसव्वुर करें किय नंबर कहां

(08:09) जाएगा इस तबार से रसूल अकरम स सलम ने जो प्रिडिक्ट किया था 1400 साल पहले व आज हर बार सादिक होता हम अपनी आंखों से देख रहे हैं बिल्कुल ऐसे ही और इस्लाम का क्लेम अभिषेक भाई जब भी आपने यह बारे में आपके जहन में कभी बात आए ना तो आपने यह चीज जहन में रखनी है कि इस्लाम इस बारे में क्लेम यानी नबी का आखरी नबी होना और उस समय पर आना और उसके बाद के हालात के बारे में खुद इस्लाम का इंटरनल क्लेम क्या है तब आपको समझ आएगी कि इस्लाम अल्लाह के रसूल उस टाइम पर क्यों आए क्यों आखरी है और बाद का मामला क्या है मिसाल के तौर पर हज्जतुल बदा के

(08:43) मौका पर अल्लाह के रसूल के मशहूर जुमले अ सला सलाम कि मैं तुम तक यह पैगाम पहुंचा चुका हूं अब तुम्हारा यह काम है कि तुमने इसको गायबी तक पहुंचाना है सूर जुमा में अल्ला ताला फरमाते हैं कि रीनल और बाद वाले ऐसे हैं जो जो अभी तक इनसे मिले नहीं है यानी जनरेशन आफ्टर जनरेशन फिर इसके बाद कुरान में दो आयात है जिसमें पता चलता है कि इस उम्मत को खैरे उम्मत कहा गया अल्लाह के रसूल पर जो ईमान लाए हैं कि जो बाद आने वाले लोगों के लिए जरिया हिदायत बनेंगे और इस तरह एक चेन बनती है नस्लों में तो किसी भी आइडियो जीी के लिए प्रैक्टिकली पॉसिबल चें जनरेशन

(09:20) होती है जिसके थ्रू वसल्लम इस जमाने के अंदर आते इंटरनेट के जमाने में तो कोई कह सकता था कि इस जमाने के अंदर तो टॉम डिक हैरी भी पॉपुलर हो गए हैं ओवरनाइट सोशल मीडिया के अंदर अल्लाह के रसूल पाक सला वसल्लम ने उस जमाने में आलमी सता पर इकरा बरपा किया 23 साल के दौर के अंदर आपने वो वो पेश गइयां की और आने वाले 30 सालों के अंदर रोमन और पर्शियन एंपायर को गिराकर एक थर्ड पावर के तौर पर पाप अप हुआ जब सोशल मीडिया भी नहीं था जब इंटरनेट भी नहीं था आज तो एवरी टॉम डि क पॉपुलर हो सकता है अल्लाह के रसूल की अदम मौजूदगी के अंदर पैगाम का आलमी सतह पर

(09:59) पपलर होना नंबर वन एक हजरत सिर्फ आखरी जुमला दूसरा इस गलतफहमी का दूर हो जाना जो पिछले तकरीबन हज साल तकरीबन 1300 बल्कि 1400 और अगर कहूं 1450 साल से जो इल्जाम ओरिएंटलिस्ट और नॉन मुस्लिम लगाते हम पर आ रहे थे एक तलवार के दौर पर फैला सोशल मीडिया के पिछले 50 सालों ने स्पेशली ट्विन टावर के बाद पिछले 20 सालों ने उस पूरे के पूरे इल्जा मात पर कलक पोत करर एक चमकदार आफताब की तरह सामने आया और बताया कि इस्लाम अपने नजरिए और अपने दलाल की बुनियाद पर ढंगा उसका बोलता है बहुत शुक्रिया और इससे बढ़कर ये बात है कि आज अगर यह सवाल किया जा रहा है कि भाई

(10:36) टेक्नोलॉजी के दौर में आप स वसल्लम को आना चाहिए था तो यह टेक्नोलॉजी तो हमेशा ऐसी नहीं रहनी है किसी को क्या पता कि आज से 200 क्या 20 साल के बाद िलया है कि जिस जमाने में कैसेट चला करती थी तो उस जमाने में ये समझते थे कि या कितनी जबरदस्त और एडवांस टेक्नोलॉजी है कि लोगों की आवाज को रिकॉर्ड कर लेती है आज उन कै सेटों का कहीं कोई पता नहीं है सीडीज का कहीं कोई पता नहीं है तो टेक्न तो इतनी तेज से तरक्की कर रही है तो यह कोई जरूरी नहीं है कि ये टेक्नोलॉजी आगे रहेगी मान लो इस टेक्नोलॉजी के दौर में आते या न्यूजपेपर के दौर में आ जाते तो आप

(11:08) लोग यह सवाल करते कि वीडियो के दौर में आना था वीडियो के दरते एआई में आना था फिर हा जी भाई अभिषेक मुफती साहब अगर कोई आदमी शिर्क को जस्टिफाई करे उसके अप ब्रिंग व जैसे मुस्लिम लोग वन गड में बिलीव करते हैं उनकी अप ब्रिंगिंग उस तरीके से होती उनके पेरेंट्स उनको पहले से ही बताती है गॉड है उसका कोई पिक्चर वगैरह नहीं है और जैसे हम लोग हिंदू है उनके पेरेंट्स हमको बताते हैं कि राम जी विष्णु का अवतार लेकर आए थे कृष्णा जी विष्णु का अवतार लेकर आए थे तो आप अपने बात को जस्टिफाई कर रहे हैं या उसको सही समझ रहे हैं और मैं मेरे बात को

(11:47) सही समझ रहा हूं तो फिर यहां पे आप क्या बोलेंगे कि भाई वो गॉड तो फिर आपके थियोलॉजी के हिसाब से को तोल में डालेगा और आपको है जन्नत में गा ठीक है अभी थोड़ी देर पहले हमारे पास स्ट्रीम में ही एक साहब आए थे जो एक मुस्लिम फैमिली में पैदा हुए और इस्लाम से निकल गए ठीक है वह क्यों निकले अपनी अकल को उन्होंने सही इस्तेमाल किया कि गलत इस्तेमाल किया वो एक अलग स्टोरी है लेकिन बहरहाल वो निकल गए तो इस तरह की एग्जांपल्स मौजूद है इस तरह के भी एग्जांपल होल्ड ऑन लेट मी कंप्लीट इस तरह के भी एग्जांपल्स मौजूद है कि जो हिंदू फैमिली में पैदा हुए और इस्लाम में दाखिल

(12:25) हो गए आप यह देख ले कि इंडिया पाकिस्तान में यानी बर सगीर ओवरऑल जो सबकॉन्टिनेंट की जो मुस्लिम पॉपुलेशन है उसमें से कितने परसेंट ऐसे होंगे कि जो बाहर से हिजरत करके आज से हजार साल पहले इंडिया आकर सेटल हुए बहुत कम मुश्किल से 10 12 पर 20 पर होंगे बहुत मान लिया मैंने उस बाकी तो सारे वही है ना कि जिनके आबा व अजदाद मुशरिक थे और उन्होंने इस्लाम कबूल किया और उसके बाद फिर वह बड़े-बड़े उलमा भी बने बड़े-बड़े सूफिया भी बने बड़े-बड़े स्कॉलर्स बने वही तो लोग हैं तो यह कोई यह कोई आपकी जो दलील है ना यह मजबूत नहीं है इसीलिए मैंने कहा कि अगरचे इस्लाम का पूरा

(13:03) पैगाम आप तक ना पहुंचा हो अकल आपके पास है कि उस अकल की रोशनी में आप यह तय कर सकते हैं के खुदा के जो ओमनिपोटेंट है कि जिसके पास मुकम्मल पावर है वह अपनी पावर को त्यात कर एक इंसान के रूप में कैसे आएगा इस हमारे दरमियान यह तो एक इंसान की अकल तस्लीम नहीं करती ना तो क्या आप इस अकल को क्या आप इस चीज को जस्टिफाई करते हैं मुफ्ती साहब एक्सेप्शन आर नॉट एग्जांपल मतलब आप जो बता रहे कि कोई आपके पास साब आए थे वो मुस्लिम घर में पैदा ईनो आई नो एक्सेप नहीं ये जो आप इतनी बड़ी पॉपुलेशन इंडिया के भाई आप मैं बता रहा हूं पाकिस्तानी मुस्लिम बांग्लादेशी मुस्लिम की इतनी बड़ी

(13:46) पॉपुलेशन आप देख रहे हो तो इसमें पूरी पॉपुलेशन के अंदर 70 टू 80 पर तो वही लोग है ना कि जिनके आबा अजदाद ने इस्लाम कबूल किया था यह कोई य कोई एक्सेप्शन तो नहीं है अच्छा पूरी दुनिया में जितने भी अब आप देख रहे हैं सब के सब आबो अजदाद ने इस्लामी तो कबूल किया था दूसरा जो अजमी है जो अजमी है आप देख लो ईरान चले जाओ अफगानिस्तान चले जाओ इराक चले जाओ सीरिया चले जाओ फलस्तीन लीबिया मिस्र यहां इन सब के अजदाद ने इस्लाम कबूल किया था यह एक्सेप्शन है बिल्कुल ऐसे ही है हिस्टोरिक रिकॉर्ड है दूसरा अभिषेक भाई अभिषेक भाई सिर्फ एक बात बोलना चाहता

(14:27) हूं मैं ये आपने समझना है जो आर्गुमेंट आप पेश कर रहे हो ना अबा अजदाद का यह आर्गुमेंट मजबूत नहीं है उसकी वजह यह है कि अबा अजदाद बहुत सी ऐसी चीजें बताते हैं जिसको औलाद फॉलो नहीं करती है तो यह कहना कि हमें उन लोगों ने बता दिया तो इसलिए इस तरह हुआ अबा अजदाद की बड़ी बातें अच्छा दूसरा यह है कि आपके अबा अजदाद से अगर आपने कोई चीजें देखी है चाहिए यह था काउंटर वेरीफाई करें हमारे हिंदू भाइयों के अंदर एक बड़ी तादात है जो मूर्ति पूजा का खंडन करती है और इसलिए नहीं खंडन करती कि वो सनातनी नहीं रहे बल् वेद की बुनियाद के ऊपर खंडन करते हैं अब उनका मानना यह है

(15:02) कि वेद से मूर्ति पूजा निषिद्ध है अवतार का कांसेप्ट है ही नहीं ठीक है वो सारी बातें यहां से रखते हैं तो ऐसी सूरत में आपके अंदर भी ऐसे लोगों की जागृति हुई ऐसे लोग उठे जिन्होंने बताया कि मूर्ति पूजा या अवतार सिस्टम नहीं होता श्री राम जी बड़े उत्तम मनुष्य थे मगर थे मनुष्य ही अच्छा एक सवाल मैं आपसे और करता हूं मान लीजिए आप एक करप्ट सोसाइटी के अंदर पैदा हो गए ठीक है करप्शन है हर तरफ रिश्वत खोरी बाजार चोरी हर तरफ जो है इस तरह की सोसाइटी में आप पैदा हो गए लेकिन आपको यह भी पता है कि यार इस करप्शन ने हमारी सोसाइटी को अंदर से खोखला कर दिया है अगर

(15:38) यह करप्शन खत्म हो जाए तो हम बहुत यानी आसानी के साथ प्रोस्पेरिटी के साथ अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं तो क्या यह आपके लिए जस्टिफिकेशन होगा कि चूंकि मैं करप्ट सोसाइटी में पैदा हुआ हूं लिहाजा मुझे तो करप्ट ही होना चाहिए नहीं मुझे तो मतलब समझना पड़ेगा कि क्या चीज सही है और उसके हिसाब से प्रोपेल करना पड़ेगा तो जिस तरीके से आप करप्शन को महज इसलिए कि करप्ट सोसाइटी में पैदा हुए हैं आप दुरुस्त नहीं समझ सकते अपनी अकल के जरिए आप फैसला करेंगे कि यह चीज गलत है और यह चीज सही है मुझे सही चीज का इंतखाब करना चाहिए हम यानी देखें इंडिया में आप

(16:12) इंडिया से ही हैं तो जो सबकॉन्टिनेंट का जो मारा था आज से 40 साल पहले आज से 50 साल पहले क्या एजुकेशन का वो लेवल था जो आज है क्या उतनी तादाद में बच्चे स्कूल जाते थे जो आज जाते हैं नहीं मां-बाप आमतौर से क्या खेतों के अंदर काम करते थे जहालत लेकिन क्या उन किसानों ने यह कहा कि चूंकि हमने खेतों में काम किया है तो हमारे बच्चे भी हमेशा खेतों में ही काम करते रहेंगे नहीं बल्कि उन्होंने खुद अपने बच्चों को स्कूल भेजा तालीम आम हुई क इसलिए उनकी अकल ने फैसला किया कि यह काम कब तक कर करब इस हिसाब से देखा जाए तो फिर वर्ड के ऑलमोस्ट लोग तो जानने में जाएंगे ना मतलब

(16:54) एक गड प और जो भी आपके अंदर 74 या 75 सेस है उसमें से क्लेम करते हैं कि हर कोई क्लेम करता है हम सही है और एक ही एक ही हेवन में जाएगा और बाकी सब हेल में जाएंगे तो फिर उस हिसाब से देखा जाए तो बहुत ऑलमोस्ट लोग तो मतलब सभी लोग तो सबका ही कट गया मतलब ठीक सबसे पहले हम इसकी बात करते हैं मुसलमान अभी सेक्ट को छोड़ दीजिए मुस्लिम वर्सेस नॉन मुस्लिमस कि भाई दुनिया में अक्सर नॉन मुस्लिम्स की अगर है पूरी तारीख में मैं सिर्फ आज की तारीख में नहीं पूरी तारीख में तो और लेकिन मुझे एक बात बताएं आप क्या आपके नजदीक वह बात हर हाल में दुरुस्त होगी कि जिसको अक्सर लोग

(17:34) सही कह रहे हैं क्या यह आपके नजदीक ूथ का पैमाना है नहीं नहीं मसलन आपके यहां खुद हिंदू सोसाइटी में आज भी छूत छात का बहुत बड़ा निजाम है और बड़ी तादाद में लोग उसको प्रैक्टिस कर रहे हैं जबकि कुछ लोग यह भी कहते हैं जो रिफॉर्मिंग है है ना आपके यहां रिफॉर्म का एकय चल रहा है ट्रेंड मुझे मालूम है लेकिन एक अरसे से सदियों से उसके ऊपर अमल चला आ रहा था तो क्या आप उस छूत छात के निजाम को दुरुस्त समझते हैं नहीं गलत है वो मतलब ववन जब के राम मंदिर का जो हो रहा है ना इंडिया में जी राम मंदिर का जो इंडिया में मेरे एरिया में तो बहुत ज्यादा सेलिब्रेशन

(18:21) वगर है पर मेरे को एक ने मतलब राम जी के बारे में बहुत मैं रिस्पेक्ट रखता हूं अभी भी पर मेरे को एक ने उसका हिस्टोरिकल प्रूफ मांगा किसी ने पता नहीं मतलब मेरी एक फ्रेंड के साथ आर्गुमेंट हो रही थी ू था वो वो एथ था तो मेरे को तब से मतलब थोड़ा हिंदू धर्म प ज्यादा य मतलब बहुत ज्यादा सर्च किया मैंने इसी को ले लीजिए के आप और आप जैसे चंद हजार लाख होंगे कि जो यह कहते होंगे कि भाई राम जी का कोई हिस्टोरिकल प्रूफ नहीं है गांधी भी उसी में आते हैं गांधी जी भी यही कह कर गए थे कि राम जी का कोई हिस्टोरिकल सबूत नहीं है लेकिन हिस्टोरिकल

(19:00) प्रूफ ना होने के बावजूद हिंदुओं की अक्सर ने मेजोरिटी ने यह मान लिया कि यहां पैदा हुए थे इस जगह इस इन इन 10 फुट वाले इस 10 फुट के कमरे में पैदा हुए थे इमेजिन करें कि एक शख्सियत जो आज से करोड़ों साल पहले लाखों करोड़ों साल पहले आई उसके बारे में ये पता हो कि इस कमरे में पैदा हुआ था ये बहुत ही मुश्किल है लेकिन लोग इसको मान रहे हैं और आप इसको तस्लीम नहीं करते तो इसका मतलब यह है कि अक्सर अगर मेजॉरिटी किसी चीज को सही माने तो व सही नहीं हो जाती खुद ब खुद अा एक चीज सवाल य पे रहेगा एक सवाल रहेगा आपका चेंज हो जाए सवाल आपका सवाल चेंज हो

(19:37) जाए तो उससे पहले मैं ये करना चाह रहा हूं आपने एक बात रखी कि इस हिसाब से तो मेजॉरिटी जो है वो जहन्नम के अंदर जाएगी जिसको हजरत ने बड़े जबरदस्त तरीके से क्लियर किया कि मेजोरिटी हमारे लिए रूल नहीं है बल्कि उसूल मैं आपको ये कहना चाहता हूं जब भी आपके जहन में ये चीज आए क्योंकि ये आती है आमतौर पर जहन में इतनी बड़ी दुनिया इतने लोग है जिनको पता ही नहीं है वो जहन्नम में जाए इसका फैसला अगर आपने और मैंने करना होता ना तो हमारा कंसर्न है ये इसका फैसला जिस अल्लाह की जात ने करना है ना इसीलिए हम मुतलू नहीं लगाते कि सारे ही जहन्नम में जाएंगे ऐसे

(20:06) नहीं फर्द मयन के ऊपर अगर हुकम लगता है तो वो लगता है और वो भी उस वक्त लगता है जब देखा जाए पूरे स्वाहिद को और उस वक्त भी कोई जन्नत और जहन्नम की तकसीम नहीं कर सकता तो यह याद रखना है कि जन्नत और जहन्नम के बारे में यह कहना कि मेजोरिटी जन्नत और जहन्नम के अंदर ये जितने हैं सारे जाएंगे यह फैसला हमारे हाथ में नहीं है हमें क्या पता आपको हिदायत मिल जाए अल्लाह ने आपके नसीब में लिखा हो आपके हिदायत मिल जाए आप सच्च को स्वीकार कर लो जैसे आप बात से लग रहा है इस तरह कही लोग कर लेंगे तो ये तो इंसान के ऊपर है ना मरते दम तक मोहलत है उसके

(20:36) पास मुफत साहब यहां प मेरा क्वेश्चन ड ऑन रहेगा जैसे बताया कि आपको राम का मतलब राम जी का मंदिर बन रहा है यहां पे तो मेरे मेरे मदर का तो बहुत ज्यादा बिलीफ है कि राम जी थे और वो हमारे आराध्य है यह बात है और सेम जगह के आपके भी अगर पेरेंट्स है मतलब आपके मदर है तो उनका भी एक बिलीफ है कि एक गॉड है और एक प्रोफेट है उस परे हमें ईमान लाना है और जो वो मरेंगे फिर उसके बाद कुछ क्वेश्चंस होंगे उसके बाद उनको हेल या हेवन में डाला जाएगा राइट मतलब आपकी थियोलॉजी के हिसाब से तो आपकी मदर सही चल रही है और मेरे मदर की थियोलॉजी के हिसाब से तो वो भी सही चल रही

(21:15) है भैया आपका जब कांसेप्ट आता है ठीक जी बोलिए बोलिए कंप्लीट कर लीजिए हां हां तो फिर आपके लजी के हिसाब से तो हम जहन्नम में ही जा रहे हैं ना मतलब मतलब मेरी भाई हमारी थियोलॉजी के तबार से तो हजरत इब्राहिम के अब्बा भी जहन्नम में जा रहे [संगीत] हैं हजरत इब्राहिम का आपको मकाम पता है हमारे यहां क्या है हत इब्रा हजरत इब्राहिम वन ऑफ द ग्रेटेस्ट मैसेंजर्स उनके बाप के बारे में कुराने करीम ने ऐलान कर दिया कि काफिर था आजर अब कुछ लोग य क कहने लगे नहीं वो चाचा थाय था वो सही तफसीर वय बाप था एक बात दूसरी बात हजरत नूह का बेटा औलाद से किसको मोहब्बत नहीं होती

(22:09) हजरत नूह जिसको आपके यहां बाज किताबों में बाज मुफ और रिफॉर्म ने कहा के मन है तो एक अलग डिबेट है लेकिन हजरत नूह का जो बेटा है जहन्नम में हजरत लूत की बेटी सॉरी बीवी जहन्नम में तो असल बात यह नहीं है कि रिश्तेदार की बुनियाद पर अल्लाह ताला फैसला नहीं करेगा अल्लाह का एक कानून है उस कानून की बुनियाद पर फैसला होगा मैं उसकी एक मिसाल दे देता हूं मिसाल यह है कि अगर मान लीजिए मैं एक मिसाल ले लीजिए मिसाल ये है कि मान ले अगर किसी मुल्क का प्राइम मिनिस्टर है या प्रेसिडेंट है और उसके किसी करीबी रिश्तेदार ने कोई जुर्म कर दिया तो क्या कानून उसके ऊपर

(22:56) नाफिया आप म्यूट करें अभिषेक भाई म्यूट प होगा होगा बस तो अब ये ये कोई बात नहीं है अच्छा और आपकी जो मदर है आपके पास य अपॉर्चुनिटी है कि आप उनकी आंखें खोले और उनको बताएं कि सही क्या है आई नो के एक उम्र तक जब आदमी पहुंचता है तो फिर किसी दूसरे रास्ते के ऊपर चलना चाहे वह कितना ही सही क्यों ना हो मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है बात यह है कि आप उनको अपनी जिंदगी बदलकर उनकी जिंदगी बदले लेकिन अगर आपको यह यकीन है कि अगर मैं इस्लाम के रास्ते पर नहीं चला मैंने एक खुदा को नहीं माना तो हो सकता है कि मैं जहन्नम में जाऊं या मैं यकीन है कि मैं जहन्नम में

(23:37) जाऊ तो सबसे पहले तो आप अपने आप को बदले और अगर अगर आपने बदल लिया तो फिर हो सकता है कि आपके जरिए आपके पूरे खानदान को हिदायत की तौफीक मिल जाए यह मुमकिन है लेकिन अगर आप महज यह सोच रहे हैं कि यार यह अजीब थियोलॉजी है के उनके तबार से तो वो ठीक है और मेरे तबार से मैं ठीक हूं यह तो हर दुनिया के हर फील्ड में होता है दुनिया की हर फील्ड में ऐसा ही है आप मसलन मैं उसकी एक और मिसाल देता हूं मसलन आप मुझे यह बताइए कि क्या आपके नजदीक डेमोक्रेसी ठीक है या डिक्टेटरशिप ठीक है किधर गए भाई मेरे ख्याल से वो निकल गए सवाल हो गए उनके चले ग

Key Takeaways:

  • Islam sirf data ya internet se nahi, fitrah aur aqal se bhi samjha ja sakta hai.
  • Nabi ﷺ ka paighaam us waqt bhi global bana jab na TV tha na phone.
  • Jis shakhs tak Islam ka paighaam nahi pohncha, uska hisaab alag hai.
  • Truth ka scale “majority” ya “technology” nahi, dalil aur haqq hai.
  • Har daur ke logon ke liye Allah ki hidayat ke tareeqay mukhtalif ho sakte hain.

Kya Technology Islam Ko Zyada Faila Sakti Thi?

Yeh sawal ek surface level thinking ka nateeja hai ke: “Agar nabi aaj aate to YouTube par unka paighaam viral hota, sab log Musalman ban jaate.”

Lekin agar hum thoda gehra sochen to samajh aata hai:

1. Har Daur Ki Apni Hikmat Hoti Hai

Allah har kaam ek khas hikmat ke saath karta hai. Agar Nabi ﷺ ka aana technology ke daur me zyada behtar hota, to wahi hota. Lekin Allah ne unhein usi waqt bhejna munasib samjha jab na printing press thi, na broadcasting. Kyu?

  • Us waqt log zyada receptive (sunnay waalay) thay.
  • Paighaam personally samjhaya ja sakta tha.
  • Islam ne logon ki zindagi me real, radical tabdeeli laayi – bina kisi media ke.

2. Kya Aaj Ki Technology Reliable Hai?

Jo log kehte hain ke Nabi aaj aate to Islam viral hota, unhein yeh bhi sochna chahiye ke:

  • Viral hone ka matlab haqq hona nahi.
  • Aaj ke daur me har jhoot bhi viral ho jata hai.
  • Aaj ka media filtered, manipulated aur biased hai – to kya guarantee ke paighaam sachhi soorat me pochta?

Kya Jinko Paighaam Nahi Pohncha, Wo Jahannum Me Jayenge?

Yeh bhi ek bara objection hota hai ke: “Agar paighaam sab tak nahi pohncha, to kya baqi log jahannum me jayenge?”

Islam ka jawab simple hai:

“Jis shakhs tak paighaam nahi pohncha, uska hisaab uski niyyat, aqal aur fitrah ke mutabiq hoga.”

Aqal har shakhs ko mili hai. Insaan khud se bhi Allah ke wujood tak pohanch sakta hai. Agar kisi ko sirf yeh nahi pata ke Allah ki ibadat ka tareeqa kya hai, to uske liye Allah ka qanoon flexible hai. Islam zalim system nahi – insaaf aur hikmat ka deen hai.


Kya Nabi ﷺ Ka Paighaam Sirf Ek Region Tak Mahdood Tha?

Nabi ﷺ ka aana ek khaas region (Arab) me hua – lekin paighaam sirf Arab ke liye nahi tha. Proof?

  • Unki prediction thi: “Mere ummati sabse zyada honge.” (Sahih Muslim)
  • Jab aap dunia se gaye, us waqt sirf ~1 lakh log Musalman thay. Aaj duniya ki fastest growing religion Islam hai.
  • 2050 tak Islam sabse bada mazhab banne ki prediction hai (Pew Research).

Ye sab itne bade scale par tab hua jab na media tha, na viral campaigns. Yeh khud ek daleel hai Nabi ﷺ ke paighaam ki haqeeqat aur taaqat ka.


Kya Truth Ka Scale Majority Hona Hai?

Kayi log sochte hain: “Agar majority kisi baat ko follow karti hai, to wohi sach hai.”

Yeh Logical Fallacy kehlati hai: Argumentum ad Populum – yani “Aksariyat keh rahi hai to theek hoga.”

  • History me aksar majority ghalat hoti hai.
  • Example: Ek daur tha jab slavery common thi, us waqt majority use support karti thi.
  • Aaj bhi duniya me aise culture norms hain jo insaniyat ke khilaaf hain – lekin accepted hain.

To haqq ki pehchaan majority nahi, dalil hai.


Kya Har Shakhs Apne Maa Baap Ke Mazhab Par Hi Rahega?

Ek aur objection hota hai: “Agar main Hindu ghar me paida hua, to meri upbringing mujhe Hindu hi banayegi. To phir main kyun galat?”

Lekin kya sirf upbringing sachai ki guarantee hai?

  • Hazrat Ibrahim ke walid mushrik thay, magar Ibrahim ne shirk reject kiya.
  • Hazrat Nuh ka beta reject kar gaya.
  • Kai log Hindu gharon me paida hoke Islam qubool kar chuke hain.

Upbringing influence hai, lekin final decision har shakhs ka khud ka hota hai. Aqal, fitrah aur sochne ki salahiyat har shakhs me hoti hai.


Kya Allah Sab Ko Barabar Mauqa Nahi Deta?

Islam kehte hai:

“Hidayat Allah ke haath me hai – lekin har shakhs ke paas hidayat tak pohanchne ka raasta zaroor hota hai.”

Chahe kisi shakhs tak direct Quran aur Hadith na pohnche, lekin agar wo apne fitrah, aqal aur zameer se khuda ki taraf rujoo kare, to Allah uska hisaab zaroor insaaf se karega.


Technology Har Daur Me Badalti Rehti Hai

Ek aur nuktah: Agar Nabi ﷺ aaj aate to log kehte ke unhein AI ke daur me aana chahiye tha. Agar AI me aate to log kehte quantum computing me aana chahiye tha. Yani…

Har daur ki apni ek “latest technology” hoti hai, magar haqq kisi daur ka mohtaaj nahi hota.

Paighaam wahi hota hai – zamana chahe badalta rahe.


Conclusion

Aakhir me hum yeh samajh paate hain ke Nabi Muhammad ﷺ ka 1400 saal pehle aana kisi kami ka sabab nahi. Balke yeh Allah ki hikmat thi. Unka paighaam na sirf us waqt faila, balke aaj bhi duniya me sabse tez tar religion hai.

Islam ek aisa deen hai jo sirf digital media ka mohtaaj nahi. Uski taaqat insan ki fitrah, aqal, aur sachai par mabni hai. Aur yeh baat sabit karti hai ke agar Nabi ﷺ kisi aur daur me aate, to bhi paighaam wahi hota – lekin Allah ne best waqt chuna.


FAQs

Q: Agar kisi shakhs tak Islam ka paighaam nahi pohncha to kya wo jahannum me jaayega?
A: Nahi, Islam ka aqeeda hai ke agar kisi shakhs tak paighaam nahi pohncha, to uska hisaab uski niyyat aur aqal ke mutabiq hoga. Allah insaaf farmayega.

Q: Agar Nabi aaj ke internet ke daur me aate to kya Islam aur tez failta?
A: Ho sakta hai viral hota, lekin viral hone ka matlab sach hona nahi. Us waqt paighaam zyada deeply samjha aur follow kiya gaya – bina kisi viral culture ke.

Q: Kya majority ki follow ki gayi cheez hamesha sach hoti hai?
A: Nahi, yeh ek logical fallacy hai. Haq aksar minority me hota hai, jab tak log usay pehchanein.

Q: Kya sirf maa baap ke kehne par mazahab follow karna theek hai?
A: Aqal har shakhs ko di gayi hai. Har shakhs ko apni soch se haqq talash karna chahiye.

Q: Kya Islam sab ke liye ek jaisa hai, ya har shakhs ka alag scale hai?
A: Islam me har shakhs ka hisaab uski niyyat, ilm aur koshish ke mutabiq hota hai. Allah sab ko equal chance deta hai.


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