Kya Qur’an Ka Na Jalna Mo’jiza Hai?

Sochiye: ek plane crash hota hai, sab kuch jalkar raakh ho jata hai, lekin Qur’an ka ek nuskha bilkul mehfooz rehta hai. Aam log isay dekh kar hairaan ho jaate hain aur kehte hain: “Wah, kya mo’jiza hai!” Lekin kya waqayi ye Qur’an ka mo’jiza hai? Kya ye Islam ke sachche hone ka saboot ban sakta hai?

Aksar social media par aise waqiyat viral hote hain jahan kisi haadse ke baad Qur’an ya kisi doosri mazhabi kitaab ka mehfooz reh jana logon ke liye mo’jiza ban jata hai. Magar haqeeqat mein mo’jiza kya hota hai? Kya aise waqiyat Islam ki sachchai sabit karte hain? Ya phir sirf jazbati taur par hum inhe kuch zyada hi overhype kar dete hain?

Is article me hum isi confusion ko door karenge. Aap jaanenge:




Transcript: (00:00) इस पूरे वाक्य में दो तरह की वीडियोस सामने आ रही हैं एक वीडियो में यह दावा किया जा रहा है के देखें कुरान करीम का यह नुस्खा जलने से रह गया और दूसरी वीडियो में जिसको जाहिर है कि गोदी मीडिया को प्रमोट करना ही है यह दावा किया जा रहा है कि देखो गीता का यह नुस्खा जलने से रह गया आम लोग इसको देखकर खुश होते हो कि हां भाई यह तो बड़ा जबरदस्त मोजजा हो गया कि इतना बड़ा हादसा हुआ है कि पूरा जहाज आग का शोला बन गया और एक शख्स के अलावा कोई कोई भी इंसान जिंदा नहीं बचा और जो कुछ उसमें था वो जलकर कोयला बन गया लेकिन कुरान का ये नुस्खा बच

(00:45) गया इसका मतलब यह मौजजा है अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातू बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब आलमीन व सलात व्सलामला सद अंबिया व मुरसलीन वला आही वही अजमाई अम्माबाद आज थोड़ा इस तरह हुआ के आमतौर से 510 मिनट की ताखर हो जाती है लेकिन आज 20 मिनट जल्दी आए हैं तो जल्दी आने की वजह यह है के स्ट्रीम को जल्दी खत्म करना है जाहिर है तो सोचा के बजाय इसके कि आज की स्ट्रीम बहुत ज्यादा मुख्तसर हो हम थोड़ा जल्दी शुरू कर देते हैं ताकि कुछ वक्त मिल जाए और फिर जो यहां मशरूफियत है उसको पूरा किया जा सके तो बहरहाल आपकी खिदमत में एक

(01:40) हफ्ते के वफे से इसलिए आना हुआ कि पिछले हफ्ते तो ईदुल अहा थी उस पर आने का कोई मतलब नहीं था तो आज की जो स्ट्रीम है उसमें वही हमारे सवाल जवाब की नशिस्त है अलबत्ता मैं एक दो बातें जरा इब्तदा में कहना चाहूंगा जो हमारे मौजू से मुतालिक है अभी दो-तीन दिन पहले एक दर्दनाक हादसा इंडिया के सूबे गुजरात के शहर अहमदाबाद में पेश आया जहां इस हादसे में एयर इंडिया की जो फ्लाइट है लंदन जाने वाली वह हादसे का शिकार हुई और इस तरीके से हुई कि पूरी दुनिया के माहिरीन एिएशन के वो परेशान है कि आखिर हुआ क्या है और जहाज भी कोई पुराना धुराना नहीं था

(02:35) लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और जिसके बारे में यह तसवुर कर लिया गया था कि यह हादसात से महफूज़ है और फिर उसका हादसा भी इस तरह हुआ के लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं के आखिर प्रॉब्लम कहां से आई इंजन फेल हुआ या फ्लैपर्स का मसला था बहाल यह तो माहरीन के ऊपर छोड़ते हैं लेकिन इस दर्दनाक वाक्य में यकीनन कईसों खानदान मुतासिर हुए हैं मुसलमान भी हैं उनमें गैर मुस्लिम भी हैं हमारी हमदर्दियां और दुआएं उन सभी के साथ हैं इस पूरे वाक्य में दो तरह की वीडियोस सामने आ रही हैं एक वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि देखें कुरान करीम का यह नुस्खा जलने से रह गया

(03:36) और दूसरी वीडियो में जिसको जाहिर है कि गोदी मीडिया को प्रमोट करना ही है यह दावा किया जा रहा है कि देखो गीता का यह नुस्खा जलने से रह गया और इन दोनों वाक्यात में हो सकता है कि दोनों ही बातें सही हो और हो सकता है कि दोनों बातें गलत हो लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दोनों बातें सही है या दोनों बातें गलत है यह वाकयात किसी मजहब की या किसी किताब की सच्चाई की दलील नहीं है और इसलिए कम से कम मुसलमानों को इस चीज से एतराज करना चाहिए यानी इससे बचना चाहिए और उसकी वजह यह है कि हो सकता है कि कुछ आम लोग इसको देखकर खुश होते हो कि हां भाई यह

(04:21) तो बड़ा जबरदस्त मौजजा हो गया कि इतना बड़ा हादसा हुआ है कि पूरा जहाज आग का शोला बन गया और एक शख्स के अलावा कोई कोई भी इंसान जिंदा नहीं बचा और जो कुछ उसमें था वो जलकर कोयला बन गया लेकिन कुरान का यह नुस्खा बच गया इसका मतलब यह मौजजा है अगर आप ऐसा समझते हैं तो आपकी जो दीनी समझ है उसमें थोड़ा थोड़ा बहुत नहीं बड़ा ही बहुत ज्यादा खलल और नक्स है कमी है और उस कमी को दूर करना जरूरी है मौजजा क्या है असल इसको समझना चाहिए मोजजा एक ऐसे अनयूजुअल इवेंट को कहते हैं जो किसी नबी के हाथ पर जाहिर हो खुसूसन उस वक्त जब के उस नबी को चैलेंज किया जाए यह

(05:11) मौजजे की डेफिनेशन है करामत एक लफ्ज है करामत करामत किसी ऐसे अनयूजुअल इवेंट को कहते हैं कि जो नबी के हाथ पर जाहिर नहीं होता गैरे नबी के हाथ पर जाहिर होता है और उसमें बाज मर्तबा उस गैरे नबी को यह पता नहीं होता कि मेरे हाथ से करामत जाहिर हो रही है ये करामत की डेफिनेशन है तो आमतौर से जो सोशल मीडिया पर वीडियोस चल रही है वो ये कि भाई ये तो कुरान का मोजजा है तो मोजजे के लिए एक तो कुरान खुद मोजजा है उससे तो किसी को इंकार ही नहीं है अगर कोई इंकार करेगा तो जाहिर है कि उसके इस्लाम में शक है वह शख्स इस्लाम से खारिज हो जाएगा

(05:55) लेकिन कुरान के किसी नुस्खे का जलने से बच जाना मोजजा नहीं है वो इसलिए नहीं है कि नबी मौजूद नहीं है वो इसलिए नहीं है कि किसी ने चैलेंज नहीं किया तो जब यह मौजजा नहीं है तो उसको मोजजे के तौर पर दिखाना और बयान करना यह दुरुस्त नहीं है हां इस तरह का एक वाकया हमें सीरत में मिलता है वो मौजजा है वाकया यह है कि जब रसूल अकरम सल्लल्लाहहु अलह वसल्लम और आपके अहलेखाना का मुशरिकने मक्का ने बॉयकॉट किया और वो बॉयकॉट कोई छोटा-मोटा नहीं बड़े लंबे अरसे चला और मुशरिक मक्का ने जितने भी वहां खानदान और कबीले थे उन्होंने आपस में एक मुहदा

(06:39) किया था बनू हाशिम को बॉयकॉट करने का और उस मुआयदे को काबे के काबे में लटका दिया था यह काबे में इसलिए लटकाया था ताकि हर कबीला उसकी पासदारी करे कि देखो भाई यह कोई मामूली मुहदा नहीं है यह मुहदा ऐसा है कि हमें अपने माबूदों की मदद करनी है और क्योंकि सारे माबूदों को बिठा रखा था काबे के अंदर तो वहीं जाकर लटकाया फिर क्या हुआ एक अरसे के बाद जब उस यानी बॉयकॉट को खत्म करने की नौबत यू आई कि वह जो मुदा वहां लटका हुआ था और उसमें जगह-गह लफ्ज अल्लाह क्योंकि अल्लाह को तो मुशरिकन भी मानते थे हां ये मानते थे कि अल्लाह के साथ दूसरे उसके शरीक हैं तो जहांजहां

(07:24) अल्लाह लिखा हुआ था उसके अलावा पूरे मुदे को दीमक ने खा लिया कुछ नहीं बचा सिवाय लफ्ज़ अल्लाह के जितनी जगह लिखा हुआ था वह बाकी रहा अब यह मौजजा है क्यों इसलिए कि नबी मौजूद है अलह सलातो्सलाम और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बाकायदा आपका बॉयकॉट किया गया और दिन रात ये ताने दिए जा रहे हैं कि अपनी नबूवत को साबित करो अगर सच्चे हो यानी चैलेंज भी मौजूद है तो चैलेंज भी मौजूद है और नबी भी मौजूद है अब यह जो वाकया हुआ है इसको मौजजा कहा जाएगा लेकिन अगर इस तरह का वाकया किसी आम हालात में हमारे जमाने में अगर हो जाए उसको आप ज्यादा से ज्यादा करामत किसी शख्स की कह

(08:11) सकते हैं ऐसे शख्स की कि जिसको खुद पता ना हो कि यह करामत है या नहीं लेकिन उसको मोजजा नहीं कह सकते वो आप इस वाक्य को बुनियाद बनाकर यह नहीं कह सकते कि चुनांचे साबित हुआ कि कुरान अल्लाह की किताब है चुनांचे साबित हुआ के कुरान अल्लाह ताला ने ही नाजिल किया है अगर ऐसा होता अगर ये चीज यानी कुरान की किसी कॉपी का ना जलना या जलने से महफूज़ रह जाना कुरान की सदाकत की दलील होती तो आपने कभी सोचा है कि कुरान करीम को फिर दुनिया में कोई भी शख्स कभी भी जला ना पाता हम हर साल इस तरह का कोई ना कोई वाकया सुनते हैं कि कभी स्वीडन में कोई खड़ा हो

(08:53) गया कभी अमेरिका में कोई खड़ा हो गया कभी किसी दूसरे मुल्क में और वो क्या कर रहे हैं कुरान की कॉपी को जला रहे हैं उसकी बेहुरमती कर रहे हैं तो अगर वाकई यह दलील होती कुरान की सच्चाई की कुरान की सदाकत की तो ना स्वीडन में और ना अमेरिका में और ना दुनिया के किसी दूसरे मुल्क में कभी भी तारीख में कोई शख्स कुरान की बेहुरमती की नियत से उसके किसी नुस्खे को जला ना पाता लेकिन यह वाकयात हम आए दिन देखते रहते हैं इससे यह साबित हुआ के यह चीज कुरान के महफूज़ होने की दलील नहीं है कुरान के महफूज़ होने की जो दलील है वो यह है के आज से लेकर शुरू से लेकर रसूल अकरम

(09:37) सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने से लेकर जब से कुरान करीम का नजूल शुरू हुआ है आज तक कुरान में कोई तब्दीली नहीं है और किसी लफ्ज को यह नहीं कहा जा सकता कि यह दौरे सहाबा में नहीं था बाद में इसको ऐड किया गया या दरे सहाबा में था और बाद में लोग उसको भूल गए यह नहीं कहा जा सकता अगर अब्रगेशन हुआ है नस हुआ है कुछ आयतें भुला दी गई है तो वो तो रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के जमाने में ही हुआ और आप वसल्लम को इत्तला कर दी गई थी कि कुछ आयतों को हम नाज़िल करने के बाद वापस ले लेंगे और वापस लेने का तरीका ये होगा कि उनको लोगों के ज़हनों से निकाल

(10:15) देंगे हटा देंगे वो भूल जाएंगे ताकि वो आयत आगे ना चले तो ये मौजजा है इसलिए आप इस तरह के ट्रैप्स में ना आए हमारे हमारा जो दीन है उसकी सच्चाई और उसकी ह्कानियत उसकी सदाकत इस तरह की जो छोटी मोटी छोटे-मोटे वाक्यात हैं इन दलीलों के ऊपर दीन की सच्चाई टिकी हुई नहीं है हमारा जो दीन है उसकी सच्चाई और उसकी हानियत इल्मी है इल्मी का मतलब यह है कि वह ऐसे दलाइल देता है ऐसे कतई और डेफिनेटिव आर्गुममेंट्स रखता है कि जिनका इंकार करना मुमकिन नहीं है या आवामी सतह की दलीलों से हम इस्लाम की सच्चाई को साबित करेंगे तो फिर होगा क्या कि उसी तरह

(11:04) की आवामी सतह की दलीलें तो दूसरे मजहब में है तो अगर यह वाकया वाकई सही है तो अगर इसी तरह का कोई इत्तफाकी वाकया किसी दूसरे मजहब में हो जाता है कि बाइबल जलने से बच गई तो फिर मानिए कि बाइबल भी सच्ची है तो इस तरह की वीडियोस फॉरवर्ड करके या उस पर खुश होना या उसको समझना कि भाई साबित हो गया चुनांचे साबित हो गया कि इस्लाम सच्चा है ये इस बात की दलील है कि हमें अपनी बुनियादों से वाकिफियत नहीं है हम यही नहीं जानते हैं कि मौजजा होता क्या है तो यह बात आप अपने जेहन में रखें और इस्लाम का दफा करें तो मजबूती के साथ करें कमजोर बुनियादों पर इस्लाम का दफा हरगिज़

(11:46) ना करें बहरहाल जो वाकया हुआ है वो वाकया बहुत ही ज्यादा रंज पहुंचाने वाला है और अफसोसनाक है और मैं दुआ करता हूं कि अल्लाह ताला हम सबको इस तरह के हादसात से महफूज़ रखे एक जमाना था जब एक बड़ा जहाज तामीर हुआ जिसको लंदन से न्यूयॉर्क जाना था टाइटेनिक और उसके बनाने वालों ने यह दावा किया कि हमने एक ऐसी टेक्नोलॉजी अभी इजाद कर ली है के कुछ भी हो जाए लेकिन यह जहाज गर्क नहीं हो सकता लेकिन फिर वो जहाज गर्क हुआ और दुनिया की तारीख में यह वाकया महफूज़ हो गया इसी तरह जो आज के दौर तौर की टेक्नोलॉजी है बहरहाल वो इंसान की बनाई हुई है वह

(12:39) खुदा की बनाई हुई नहीं है खुदा ने इंसान को अकल दी है और इंसान अपनी अकल से कुछ चीजें डेवप करता है औरकि इंसान है तो उसमें हमेशा कहीं ना कहीं कमी रह जाती है खुदा के यहां कमी नहीं है तो खुदा का बनाया हुआ निजाम फेल नहीं होता ऐसा नहीं कि भाई अचानक क्या हुआ कि वो सूरज की बत्ती गुल हो गई पीछे के जो जनरेटर रखे हुए थे ये बैठ रहे थे वो फेल हो गए ऐसा नहीं होगा खुदा जब तक चाहेगा सूरज रोशनी देगा उसका निजाम चलता रहेगा वो निजाम कोलप्स नहीं करेगा इला के खुदा ही चाहेगा उस निजाम को शट डाउन कर दे तो वो शट ऑफ हो जाएगा तो ये इंसान की जो बनाई हुई टेक्नोलॉजी है

(13:22) उसमेंकि कमाल नहीं है परफेक्शन नहीं है नक्स है वो कितना ही दावा कर ले कि अब इस ये हादसे का शिकार नहीं हुआ लेकिन वही टेक्नोलॉजी पर हादसे का शिकार होती है वो चाहे समंदर का जहाज हो या फिर हवाओं में तैरने वाला जहाज हो वो कहीं भी तैरे लेकिन उसके बारे में यह दावा करना कि अब यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है कि इसके ऊपर कोई हादसा नहीं आ सकता यह दावा करना दरअसल खुदाई का दावा करना है और फिर अल्लाह ताला कभी-कभी दिखा देता है के इंसान की बनाई हुई टेक्नोलॉजी किस तरीके से फेल होती है

Key Takeaways:

  • Qur’an ka mehfooz reh jana ek ittefaq ho sakta hai, mo’jiza nahi.
  • Mo’jiza sirf Nabi ke haathon, challenge ke muqaam par hota hai.
  • Qur’an ka asal mo’jiza uski lafzon ki tahafuz aur ilmiy daleelon me hai.
  • Islam ki sachchai social media videos se nahi, ilmiy dalail se sabit hoti hai.
  • Har ajeeb waqiya deen ki sachchai ka saboot nahi ban sakta.

Mo’jiza Aur Karamaat: Farq Samajhna Zaroori Hai

Logon ka ek aam confusion hota hai ke har unusual cheez mo’jiza hoti hai. Magar Islam me mo’jiza ki clear definition hai:

  • Mo’jiza: Wo ajib aur ghair-mamooli waqiya jo sirf ek Nabi ke haath se zahir hota hai, jab usse challenge kiya gaya ho. Mo’jiza ka maqsad hota hai nubuwwat ko sabit karna.
  • Karamaat: Ajeeb waqiyat jo kisi buzurg ya saleh shakhs ke haath se zahir hon, bina uske irade ke, aur jiska kisi challenge se lena dena na ho.

Agar kisi Qur’an ke nuskhe ka jalne se mehfooz reh jana koi waqiya ho bhi gaya ho, to ye ya to ek ittefaq hai, ya zyada se zyada ek karamat. Isay mo’jiza kehna ilmiy taur par ghalat hai.


Kya Aise Waqiyat Qur’an Ki Haqeeqat Sabit Karte Hain?

Kayi log ye kehte hain ke agar Qur’an aag me nahi jala, to is ka matlab hai ye Allah ki kitaab hai. Magar agar aisa hota, to koi bhi Qur’an kabhi bhi jala hi na paata.

  • Har saal hum dekhte hain ke Sweden, America aur doosre mulkon me Qur’an ki copies jalayi ja rahi hain.
  • Agar na jalna hi Qur’an ke Allah ki taraf se hone ka saboot hota, to kisi bhi shakhs ke liye Qur’an jalana mumkin hi na hota.

Ye logic khud apne aap ko tor deta hai. Jo cheez ittefaq se kabhi kabhi hoti hai, wo sabit nahi karti ke har dafa waisa hi hoga.


Qur’an Ka Asli Mo’jiza Kya Hai?

Qur’an ka asal mo’jiza ye nahi ke koi copy aag me na jale. Qur’an ka mo’jiza hai:

  • Uska lafzi tahafuz: 1400 saal se ek lafz, ek harf tak nahi badla.
  • Ilmiy daleel: Qur’an ke andar aise logical, ethical aur scientific nuqtaat hain jo kisi insaan ka kaam nahi lagte.
  • Challenge: Qur’an khud daawat deta hai ke agar shak hai to us jaisa ek surah le aao (Surah Al-Baqarah: 23).

Mo’jiza wahi hota hai jo Nabi ke haath se zahir ho aur jiska ilmiy maqsad ho – sirf emotional viral video banana mo’jiza nahi hota.


Agar Ye Qur’an Ka Mo’jiza Hai, To Geeta Ka Kya?

Ye bhi sochne ki baat hai – agar kisi haadse me Geeta ka nuskha bhi mehfooz reh jaye (jaise kuch videos dikhate hain), to kya usay bhi mo’jiza maana jayega?

Agar hum har aise waqiya ko “mo’jiza” kahenge, to phir doosre mazhab bhi yehi claim karenge. Is tarah ke waqiyat sab mazhabon me paye jaate hain – lekin ye ilm ka maidaan nahi, jazbaat ka maidaan ban jaata hai.

Islam ki sachchai ko itni kamzor buniyadon par khada karna khatarnaak hai. Islam ki buniyad uske ilmiy dalail, akhlaaq, aur insaniyat par mabni taaleem par hai – na ke kisi viral clip par.


Islam Aur Tahafuz-e-Qur’an: Asliyat Kya Hai?

Qur’an ka tahafuz Allah ne khud zimmedari li hai:

“Hum ne hi is Qur’an ko nazil kiya, aur hum hi iske muhafiz hain.” (Surah Al-Hijr: 9)

Iska matlab hai:

  • Na isme lafzon ka taghayyur hua hai
  • Na isme mazmoon ka tahreef hui hai
  • Na hi iski asli copy zarurat hai is sabit karne ke liye

Qur’an hazaaron hafizon ke zaban se, har zamane me ek hi tarah parhaya jaata hai. Ye hai asli tahafuz – memory-based preservation, jo kisi bhi aur kitaab ko naseeb nahi hua.


Technology, Human Limits & Divine Order

Insani technology jitni bhi advanced ho jaye, usme naqs hamesha hota hai. Aaj ka plane ya ship kitna bhi secure ho, wo Allah ke hukum ke baghair mehfooz nahi ho sakta.

  • Titanic jaisa jahaz bhi dub gaya, jise unsinkable kaha gaya tha.
  • Air India ka modern aircraft bhi crash ho gaya, jise top safety features diye gaye the.

Is se sabit hota hai ke insani daaway hamesha naaqis hote hain, lekin Allah ka nizaam kabhi fail nahi hota. Jo nizaam Allah ne banaya – jaise suraj ka chalna, ya barish ka ana – wo sirf Allah ke hukum se hi rukta hai.


Natija

Yeh samajhna bohot zaruri hai ke Islam ek aise deen ka naam hai jo jazbaat nahi, dalail par qaim hai. Qur’an ka koi nuskha agar aag se mehfooz reh jaye, to wo sirf ek ittifaq hai – usse Islam ki sachchai sabit nahi hoti.

Agar hum har ajeeb waqiya ko deen ki dalil banana shuru kar dein, to phir har mazhab ko sacha manna padega. Islam ka asal mo’jiza uska lafzi tahafuz, logical coherence, aur ilmiy nizaam hai – na ke viral clips aur headlines.

Humein apni da’wat aur dawah ka markaz social media sensations nahi, Qur’an ka asal paighaam banana hoga. Tabhi logon ke zehanon tak Islam ka sachcha roop pahunch sakega.


FAQs

Q: Kya Qur’an ka na jalna mo’jiza nahi ho sakta?
A: Nahi. Mo’jiza sirf Nabi ke haath se, challenge ke waqt zahir hota hai. Aise waqiyat ya to ittefaq hain, ya karamaat.

Q: Kya aise waqiyat Islam ki sachchai ka saboot ban sakte hain?
A: Nahi. Islam ki sachchai logical, ilmiy aur Qur’anic daleelon se sabit hoti hai – jazbaati waqiyat se nahi.

Q: Kya Geeta ya Bible ke nuskhe bhi mehfooz rahe hain aise waqiyat me?
A: Haan, kuch log aise claims karte hain. Is wajah se har waqiya ko mo’jiza kahna ilmi taur par ghalat hai.

Q: Kya Qur’an hamesha jalne se mehfooz raha hai?
A: Nahi. Aise waqiyat hain jahan Qur’an ki copies jalayi gayi hain. Is wajah se “na jalna” ko daleel banana ghalat hai.

Q: Islam ka asal mo’jiza kya hai?
A: Qur’an khud ek mo’jiza hai – apni zabaan, paighaam, tahafuz aur challenge ki buniyad par.


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